Prajapati ka chora su...new song 2017 haryanvi

Kuldeep Prajapati AHP  /  People & Blogs

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इतिहास के पन्नों से

सृष्टि रचनाकार प्रजापति ब्रह्मा कुम्हार ही है जो कालचक्र से मिट्टी के मानव बनाते है और मिट्टी में ही मिला देते है।
ब्रह्मा सर्वगुण सम्पन्न होने के कारण प्रजापति की उपाधि से विभूषित है। प्रजापति ब्रह्मा के मूलनाम के वंशजों ने दक्ष प्रजापति तक पृथ्वी पर वैभवशाली शासन किया है।
दक्ष प्रजापति में भी सर्वसम्पन्न कुल विद्यमान थे। ये उच्च कोटि के ब्राह्मण थे इनके समान कोई यज्ञ वेता नहीं है। ये क्षत्रिय श्िक्त के है, इनमें वैश्य के गुण भी है तो ये अच्छे सेवक भी है। कुम्हार जाति अपने पूर्वजों के गुण-धर्म-दोष से ओत-प्रोत है।
कुम्हार जाति में सभी युग है इसी कारण इन्हें प्रजापति नाम की उपाधि मिली है। 
जो जाति सब जातियों की संसार की आदि व पूर्वज जाति है जो भारत व संसार के कोने-कोने में है उसके बारे में उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ लोग कहते है कि कुम्हार जाति राजपूतों से निकली जाति है जबकि राजपूत नाम तो मुसलमानों को दिया नाम है जो मुगलकाल के समय से प्रचलित हुआ है। पहले ये क्षत्रिय नाम से जाने जाते थे और इनके पूर्वज व ये कुम्हार ही है। इनका शरीर कुम्हार है। मिट्टी का है जो मिट्टी में ही समा जाता है।
अतः जिस क्षत्रिय (राजपूत) जाति की उत्पति का श्रोत ब्रह्मा है और ब्रह्मा कुम्हार है राजपूत जाति से कुम्हार जाति निकली है कहा जाय ये तो वही बात हुई जैसे कुए से पानी चाठ में, चाठ में कुण्डी में, कुण्डी से कोठे में और कोठे से खेली में और कुंआ ये कहे कि मेरा पानी तो खेली से आता है।
तो आप समझ गये होंगे कि कुम्हार कौन है?
कुम्हारों से कलियुग में रंकण-बंकण नाम के उच्च कोटि के गृहस्थ संत हुवे जिसके अनुयाई आज रांकावत स्वामी समाज के नाम से अपने गौरवमय सफर में चल रहे है। 
पिछली 20वीं सदि में कुम्हारों की बड़ी ढाणी, कानासर, बीकानेर में गृहस्थी सन्त गणेशनाथ जी ने कठोर तपस्या की और पांच दिन पहले घोषणा की मैं अमुक दिन शरीर का त्याग करूंगा और पांचवे दिन व्याख्यान देकर कहा अब मैं चलूं और शरीर छोड़ गये।
श्री धाराजी, अजीतगढ़ में बाल ब्रह्मचारी संत गोपाल भारती ने ग्यारस के दिन सुर्योदय के दर्शन करके शरीर छोड़ा था।
अतः कुम्हार उच्च कोटि के ब्राह्मण है, संत है, उच्च कोटि के क्षत्रिय है उच्च कोटि के वैश्य है तो उच्च कोटि के शूद्र (सेवक) है।
पाण्डवों के राजसूययज्ञ में श्री कृष्ण ने सेवा करने पर भीष्म पितामह ने सम्मान दिलाया था तो सेवा करना तो सर्वापरि है कुम्हार सभी गुणों से ओत-पा्रेत है इसलिए इन्हें प्रजापति कहते हैं पर सती प्रकरण की महापंचायत में राजकीय शक्ति को निष्क्रय कर दी जिस दिन इस अभिशप्त से कुम्हार मुक्त हो जायेंगे राजसत्ता भी इनकी मुट्ठी में होगी। अभी कुम्हारों का सत्ता परिवर्तन करने में मुख्य मौन भूमिका है।
ब्रह्मा प्रजापति के वंशज प्रजापति ही है। प्रजापतियों ने नये-नये अनुसंधान किये इसलिए श्रेष्ठ या आर्य कहलाये। ऋषि-मुनियों की प्रेरणा के कार्य किये इसलिए आर्ष भी होने चाहिये थे, परन्तु हिन्दू कैसे हो गये? हम भारतीय होने चाहिये। हिन्दुस्तानी ओर इण्डियन कैसे हो गये? 
हम प्रजापति होने चाहिए।
ò ही ब्रह्माण्ड की सर्वोपरि शक्ति है। ब्रह्माण्ड की रचना ò ने की है। प्रजापति ब्रह्मा ही सृष्टि रचियता है। जिन्होंने ब्रह्माण्ड की रचना के बाद पृथ्वी पर सजीव-निर्जीव के स्वरूप बनाये। पंच महाभूतों, ग्रहों, नक्षत्रों आदि के साथ विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु-वनस्पति के पेड़-पौधों का सृजन किया। इनका पालन-पोषण किया। सत्-असत् की क्रिया कलापों का सृजन किया।
ब्रह्माण्ड के पृथ्वी ग्रह पर प्रजापति ब्रह्मा ने काल चक्र से सत्-असत् का सृजन किया है।
इन्हीं में मानवरूपी जीव का भी मिट्टी से सृजन किया। मानव मिट्टी का होता है। मिट्टी से जन्म लेता है। मिट्टी में ही फलता-फूलता है। मिट्टी में क्रिया-कलाप करता हैं। मिट्टी में रहकर सृष्टि निर्माण कर्ता के साथ मिलकर सृष्टि के विकास में सहयोग करता है। बच्चा जन्म के समय गीली मिट्टी का होता है। मानव-मरकर मिट्टी में मिल जाता है। अतः जब मानव रूपी जीव विकास करते-करते शैशव काल में आता है तो मिट्टी से खेलता हैं मिट्टी से खेलते-खेलते पत्थरों से खेलता है।
मिट्टी के घरौन्दे बनाता है। घरौन्दो को तोड़ता है।
इस प्रकार चलते-चलते मिट्टी के पात्र बनाता है। पत्थरों को तोड़ते-तोड़ते अग्नि की चिनगारियों को समझता है।
अग्नि का अविष्कार करता है। पत्थरों को तोड़ते समय जो पत्थर गिरते हैं और गोल-गोल उछलते गिरते देखकर प्रेरित होकर पहिये का आविष्कार किया।
पहिये, चक्र का अविष्कार करता है, उसे धुरी पर चलाता है।
ओर अपने गुण-धर्म के अनुसार मिट्टी के बर्तन बनाता है। पत्थर के बर्तन, औजार आदि बनाता हुवा प्रगतिपथ पर चलता रहता है।
इस प्रकार प्रजापति ब्रह्मा मिट्टी से जिस मानव रूपी जीव को बनाता है। मानव अपनी बुद्धि कौशल से अपने जन्मदाता, सृजनकर्ता, प्रजापति ब्रह्मा के गुण-धर्म प्राप्त करके जीवों में सर्वश्रेष्ठ शक्तिशाली जीव बन जाता है। 
इस प्रकार मानव चक्र से, पहिये से मिट्टी के विभिन्न प्रकार के बर्तन बनाता है जो टूट जाने पर मिट्टी में मिल जाते हैं। मानव भी मरकर मिट्टी में मिल जाता है।
प्रजापति ब्रह्मा के इस गुण के कारण प्रजापति ब्रह्मा व प्रजापति द्वारा सृजन किया गया मानव भी कुम्भकार, कुम्हार कहलाता है।
मानव जब कुम्भकार रूप में था तब चक्र, पहिये व अग्नि का आविष्कार किया।
पहिये को ध्ुरी पर घुमाया। सृष्टि रचना में प्रथम वैज्ञानिक चमत्कार किया। आज कुम्भकार के इसी आविष्कार के कारण विज्ञान ने इतनी तरक्की की है।
इस प्रकार मानव ने सत्युग से त्रेतायुग से द्वापर युग और कलियुग के इस काल तक के सफर में कई उतार-चढ़ाव, प्रलय-महाप्रलय देखे है।
जब मानव जंगीली था। वनस्पति से, जीवों से उदरपूर्ति करता था। ऐसा करते-करते कृषि-गोपालक तक के सफर में मानव ने परिवार-समाज, कबीलों, गांवों, नगरों तक का सफर किया है।
इस तरह मानव ने सनातन धर्म के वेदों का ज् ⛳️🙏🏻राम भक्त कुलदीप प्रजापति